लव जिहाद के खिलाफ कानून बनना क्यों है जरूरी!

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बेंगलूरु, (परिवर्तन)।

देश के कई राज्यों में लव जिहाद का मामले ने सुर्खियां बटोर रखी है। कई राज्य सरकारों ने इस पर कड़े कानून बनाने का निर्णय लिया है। इसे लेकर पूरे देश में गरमाए माहौल के बीच बीते मंगलवार को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020 के मसौदे को मंजूरी दे दी गई। राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून प्रभावी हो जाएगा। नया कानून अमल में आने के बाद प्रदेश में बलपूर्वक, झूठ बोलकर, लालच देकर या अन्य किसी कपटपूर्ण तरीके से अथवा विवाह के लिए धर्म परिवर्तन गैर जमानती अपराध होगा। नए कानून के अनुसार एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन के लिए संबंधित पक्षों को विहित प्राधिकारी के समक्ष उद्घोषणा करनी होगी कि यह धर्म परिवर्तन पूरी तरह स्वेच्छा से है। संबंधित लोगों को यह बताना होगा कि उन पर कहीं भी, किसी भी तरह का कोई प्रलोभन या दबाव नहीं है।

संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप का कहना है कि कोई भी राज्य सरकार चाहे तो धर्मांतरण रोकने के लिए कानून बना सकती है। इसमें जबरन धर्म बदलने और जबरन शादी करने को लेकर कानूनी प्रावधान हो सकते हैं। कोई भी व्यक्ति धर्म के प्रलोभन में आकर धर्म नहीं बदल सकता है। ओडीशा में 1967 से ही कपटपूर्वक धर्मांतरण प्रतिबंधित है। इस कानून के मुताबिक प्रलोभन, ताकत या किसी भी प्रकार से प्रताड़ित करके व्यक्ति का धर्मांतरण नहीं किया जा सकता है। इस प्रकार से यदि धर्म परिवर्तन किया जाता है तो धर्मांतरण कराने वाले व्यक्ति को एक साल की सजा और 50 हजार के जुर्माने का प्रावधान है। 2017 में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने विवाह केवल वैवाहिक लक्ष्य पूर्ति के लिए धर्म परिवर्तन करने की मंशा पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव प्रदेश सरकार को दिया था।

क्या भाजपा प्रशासित राज्यों में बनेंगे कानून

देश के कई नगरों में बड़े विवाद का कारण बन रहे लव जिहाद पर प्रतिबंध के लिए कठोर कानूनी उपाय जरूरी हैं। मध्य प्रदेश समेत उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, कर्नाटक की राज्य सरकारों ने इस दृष्टि से कानून के प्रारूप की तैयारी शुरू कर दी है। इस नजरिए से मप्र सरकार मध्य प्रदेश धर्म स्वातंत्रय (संशोधन) विधेयक 2020 आगामी विधानसभा सत्र में लाएगी। भाजपा प्रशासित राज्यों में लव जिहाद के मुद्दे को प्रमुखता से लेते हुए इसे कानून के तहत लाने का फैसला लिया जा रहा है। हिंदु समाज ही नहीं बल्कि केरल की कैथोलिक चर्च भी ऐसे प्रेम को लव जिहाद कह कर ईसाई समाज को चेतावनी दे रहा है। 19 जनवरी 2020 को सर्वोच्च सिरो मालाबार कैथोलिक चर्च ने प्रति रविवार को होने वाली प्रार्थना सभा में एक परिपत्र जारी कर कहा कि ईसाई लड़कियों को प्यार के जाल में फंसाकर उनका धर्मांतरण कर उन्हें आतंकी संगठन इस्लामी स्टेट (आईएस) का सदस्य तक बनाया जा रहा है। इसीलिए कानून का बनना और उसे सख्ती से लागू किया जाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लेकिन प्रश्न यह है कि क्या इस कानून की जरूरत केवल भाजपा प्रशासित राज्यों को ही है? क्या इस कानून को लेकर सख्ती केवल पूरे देश में नहीं है? इस पर विचार करने की जरूरत है। कहीं ऐसा न हो कि आने वाले दिनों में इस गंभीर मुद्दे को लेकर भी राजनीति शुरु हो जाए और पार्टियां केवल अपने हित साधने के लिए इसे हथियार के रूप पर जनता की भावनाओं पर प्रहार करे। 

क्या है इस कानून में

इस कानून के लागू होने के बाद अब प्रदेश में किसी एक धर्म से दूसरे धर्म में लड़की के धर्म में परिवर्तन से एक मात्र प्रयोजन के लिए किए गए विवाह पर ऐसा विवाह शून्य (अमान्य) की श्रेणी लाया जा सकेगा। दबाव डालकर या झूठ बोलकर अथवा किसी अन्य कपट पूर्ण ढंग से अगर धर्म परिवर्तन कराया गया तो यह एक संज्ञेय अपराध माना जाएगा और इस गैर जमानती प्रकृति के अपराध के मामले में प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के न्यायालय में मुकदमा चलेगा। दोष सिद्ध हुआ तो दोषी को कम से कम 01 वर्ष और अधिकतम 05 वर्ष की सजा भुगतनी होगी। साथ ही कम से कम 15,000 रुपए का जुर्माना भी भरना होगा। अगर मामला अवयस्क महिला, अनूसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की महिला के संबंध में हुआ तो दोषी को 03 वर्ष से 10 वर्ष तक कारावास की सजा और न्यूनतम 25,000 रुपये जुर्माना अदा करना पड़ेगा।

अध्यादेश में धर्म परिवर्तन के सभी पहलुओं पर प्रावधान तय किए गए हैं। इसके अनुसार धर्म परिवर्तन का इच्छुक होने पर संबंधित पक्षों को तय प्रारूप पर जिला मजिस्ट्रेट को दो माह पहले सूचना देनी होगी। इसका उल्लंघन करने पर छह माह से तीन वर्ष तक की सजा हो सकती है जबकि इस अपराध में न्यूनतम जुर्माना 10,000 रुपये तय किया गया है। यही नहीं योगी सरकार ने सामूहिक धर्म परिवर्तन की घटनाओं पर लगाम लगाने के भी पुख्ता इंतजाम किए हैं। नए कानून में सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामले में तीन से 10 वर्ष तक जेल हो सकती है और कम से कम 50,000 रुपये का जुर्माना भरना होगा।

क्यों है कानून की जरूरत? 

प्रसिद्ध लेखक डॉ वेद प्रकाश वैदिक लिखते हैं, इस तरह का कठोर कानून लाने की जरूरत क्यों समझी जा रही है? कुछ लोगों का मानना है कि भाजपा सरकारें यह कानून इसलिए ला रही हैं कि वे मुसलमान-विरोधी हैं? यह सच्चाई नहीं है। यदि यह कानून बनेगा तो ऐसा बनेगा, जो हिंदू-मुसलमानों पर एक-जैसा लागू होगा। न तो लालच या डर के मारे हिंदू लड़कियों को मुलसमान बनाया जा सकेगा और न ही मुसलमान लड़कियों को हिंदू ! दोनों पर यह कानून समान रूप से लागू होगा। यदि नहीं होगा तो अदालतें इसे असंवैधानिक घोषित कर देंगी। कोई भी अदालत किसी को भी स्वेच्छा से धर्म-परिवर्तन करने से रोक नहीं सकतीं।

यहां असली प्रश्न यह है कि ऐसा कानून क्यों लाना पड़ रहा है? यह इसलिए लाया जा रहा है कि कुछ दिन पहले केरल और कर्नाटक के पादरियों ने शोर मचाया था कि उनकी लगभग 4000 ईसाई बेटियों को डराकर, लालच देकर, झूठ बोलकर और फुसलाकर मुसलमान बना लिया गया है। जो काम अंग्रेज के जमाने में विदेशी पादरी लोग बेखटके करते थे, उसी काम का आरोप उन्होंने मौलवियों पर लगाया। शादी के नाम पर किया गया यह धर्मांतरण अनैतिक है। इसे रोका जाना चाहिए। केंद्रीय जांच एजेंसी ने पाया कि कुछ विदेशी ताकतें इस काम को योजनाबद्ध ढंग से कर रही हैं। अभी कुछ दिन पहले हरियाणा में एक हिंदू लड़की की हत्या का कारण भी यही बताया जाता है कि एक मुसलमान लड़का उससे शादी करने पर उतारू था लेकिन लड़की ने उसे मना कर दिया था। इसे ही 'लव-जिहाद' कहा जाता है।

मेरा मानना है कि जहां लव होता है, वहां जिहाद के लिए जगह ही नहीं रहती। जिहाद वहीं होता है, जहां दिल में ईंटें भरी हों ओर लबों पर खुदा होता है। मैं अमेरिका, सूरिनाम, मोरिशस, रूस और चीन जैसे कई देशों में अपने मित्र-परिवारों के साथ रहता रहा हूं, जिनमें पति-पत्नी अलग-अलग मज़हबों को माननेवाले हैं लेकिन वे बड़े प्रेम के साथ रहते हैं। हिंदू पति अपनी मुसलमान पत्नी के साथ रोज़ा रखता है और मुस्लिम पत्नी अपने पति और मित्रों के सामने मग्न होकर कृष्ण-भजन गाती है। हिंदू पति गिरजे में जाता है तो ईसाई गोरी पत्नी मंदिर में आरती उतारती है। यदि आपके दिल में किसी के लिए सच्चा प्रेम है, तो सारे भेद-भाव हवा हो जाते हैं। आपकी दृष्टि अभेद और अद्वैत हो जाती है।

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