वैक्सीन पर राजनीति

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बेंगलूरु, (परिवर्तन)।

कोरोना वायरस महामारी के कहर से आज दुनिया का लगभग हर देश परेशान है। कुछ देशों में परिस्थिति इतनी भयावह रूप ले चुकी है कि वहां की सरकारों ने फिर से देश में लॉकडाउन की घोषणा तक कर दी है। इस बीच हमारे लिए गर्व की बात है कि देश के वैज्ञानिकों द्वारा कड़ी मेहनत से बनाई गई एक नहीं बल्कि दो - दो कोरोना वैक्सीन को मान्यता मिल गई है। अच्छी खबर ये भी है कि इसी माह से देश के नागरिकों में टीकाकरण की शुरुआत भी होनी है। हालांकि अफसोस इस बात का है कि कई दिशाओं से वैक्सीन की सत्यता पर विभिन्न प्रकार के सवाल किये जा रहे हैं। अगर वैक्सीन को लेकर किसी भी प्रकार का संदेह हो या किसी प्रकार का प्रश्न हो तो ये देश के वैज्ञानिकों की ओर से उठाया जाना चाहिए, लेकिन राजनीति के खेल में शामिल राजनेताओं की ओर से ये सवाल उठाया जाना कहां तक उचित है। आज वैक्सीन पर सवाल उठाया जाना मतलब देश के वैज्ञानिकों के श्रम और उनके समर्पण पर सवाल करने जैसा है।  

वहीं दूसरी ओर कई विपक्षी नेता इस पर हट लगाए बैठे हैं कि वे भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा बनाए गए इस वैक्सीन का बहिष्कार करेंगे। कुछ नेताओं ने तो यहां तक कह दिया है कि सरकार द्वारा यह वैक्सीन देश के लोगों को नपुंसक बनाने की घोर साज़िश है। इन नेताओं के इस प्रकार की सोच और उनके दिमागी दिवालियेपन को लेकर कितनी भी भत्सना की जाए कम हैं, क्योंकि यह वक्त पार्टी पॉलिटिक्स करने का नहीं बल्कि एकजुट होकर कोरोना वायरस महामारी से लड़ने का है। देश में वैक्सीन पर राजनीति किया जाना हमारे देश के वैज्ञानिकों का अपमान करने जैसा है। विपक्षी नेताओं द्वारा सरकार को सवालों से घेरने के लिए वैज्ञानिकों की कौशलता पर सवाल किया जाना देश के भविष्य के लिए चिंताजनक स्थिति उत्पन्न कर सकती है। लोकतंत्र में सवाल करना जरूरी है, लेकिन उन सवालों से भावनाएं या कड़ी मेहनत आहत न हो इसका ध्यान रखा जाना भी बेहद जरूरी है। 

अगर वैज्ञानिक यह कह रहे हैं कि टीका पूरी तरह से सुरक्षित है, और ये देश को कोरोना से मुक्ति दिला सकेगा तो उनकी बातों पर पूरी तरह अविश्वास करना उचित नहीं होगा। कड़ी मेहनत और महीनों के परिश्रम के बाद जब वैक्सीन को मंजूरी मिली तो लोगों में नई उम्मीद जागी है। आज वैक्सीन को एक ही उपाय से सत्यापित किया जा सकता है कि देश के प्रधानमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और गृह मंत्री अगर स्वयं वैक्सीन लेकर इस टीकाकरण अभियान की शुरुआत करें। इस प्रकार न तो जनता और न ही विपक्षी नेताओं के मन में सवाल उठेंगे और न ही वैज्ञानिकों की कौशलता पर संदेह किया जाएगा। क्योंकि देश में राजनीति तो चलती ही रहेगी लेकिन अगर कोरोना वायरस महामारी ने विकराल रूप ले लिया तो संभालना मुश्किल हो जाएगा। हमारे अखबार के माध्यम से भी हमने कई बार सरकारी की नीतियों पर सवाल किया है और देश में परिवर्तन लाने की दिशा में काम किया है। आज भी हम वैक्सीन को मिली मंजूरी को लोगों तक लाने की गुजारिश सरकार से कर रहे हैं, ताकि वैक्सीन को लेकर आने वाले दिनों में किसी प्रकार की राजनीति न हो सके। 


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